श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी के पूछने पर वृद्धा तापसी का अपना तथा उस दिव्य स्थान का परिचय देकर सब वानरों को भोजन के लिये कहना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.51.19 
शुचीन्यभ्यवहाराणि मूलानि च फलानि च।
भुक्त्वा पीत्वा च पानीयं सर्वं मे वक्तुमर्हसि॥ १९॥
 
 
अनुवाद
अच्छा, यह शुद्ध अन्न, फल-मूल आदि हैं। इन्हें खाओ और जल पियो। फिर मुझे अपना सब वृत्तांत बताओ।॥19॥
 
Okay, here are pure food and fruits and roots. Eat them and drink water. Then tell me your whole story.'॥ 19॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे एकपञ्चाश: सर्ग: ॥ ५ १॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें इक्यावनवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ५ १॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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