Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.51.18-19h: 'यहाँ तुम्हारा क्या काम है? तुम किस उद्देश्य से इस दुर्गम स्थान में विचरण करते हो? इस वन में आना बड़ा कठिन है। तुमने इसे कैसे देखा?॥18 1/2॥ | ramayan सर्ग 4.51: हनुमान जी के पूछने पर वृद्धा तापसी का अपना तथा उस दिव्य स्थान का परिचय देकर सब वानरों को भोजन के लिये कहना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किं कार्यं कस्य वा हेतो: कान्ताराणि प्रपद्यथ॥ १८॥
कथं चेदं वनं दुर्गं युष्माभिरुपलक्षितम्।
अनुवाद
'यहाँ तुम्हारा क्या काम है? तुम किस उद्देश्य से इस दुर्गम स्थान में विचरण करते हो? इस वन में आना बड़ा कठिन है। तुमने इसे कैसे देखा?॥18 1/2॥
‘What is your business here? For what purpose do you wander in these remote places? It is very difficult to come to this forest. How did you see it?॥18 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥