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ramayan 4.51.15-16h: उसके बाद भगवान ब्रह्मा ने यह सुन्दर वन, इसके अक्षय यौन सुख और यह स्वर्ण भवन हेमा को दे दिया।   |   ramayan सर्ग 4.51: हनुमान जी के पूछने पर वृद्धा तापसी का अपना तथा उस दिव्य स्थान का परिचय देकर सब वानरों को भोजन के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी के पूछने पर वृद्धा तापसी का अपना तथा उस दिव्य स्थान का परिचय देकर सब वानरों को भोजन के लिये कहना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  4.51.15-16h 
इदं च ब्रह्मणा दत्तं हेमायै वनमुत्तमम्॥ १५॥
शाश्वत: कामभोगश्च गृहं चेदं हिरण्मयम्।
 
 
अनुवाद
उसके बाद भगवान ब्रह्मा ने यह सुन्दर वन, इसके अक्षय यौन सुख और यह स्वर्ण भवन हेमा को दे दिया।
 
After that, Lord Brahma gave this beautiful forest, its inexhaustible sexual pleasures and this golden mansion to Hema.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)