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ramayan 4.51.13-14h: सम्पूर्ण कामनाओं को धारण करने वाला बलवान मयासुर यहाँ की सम्पूर्ण वस्तुओं को उत्पन्न करके इस महान वन में कुछ काल तक सुखपूर्वक निवास करता रहा ॥13 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.51: हनुमान जी के पूछने पर वृद्धा तापसी का अपना तथा उस दिव्य स्थान का परिचय देकर सब वानरों को भोजन के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी के पूछने पर वृद्धा तापसी का अपना तथा उस दिव्य स्थान का परिचय देकर सब वानरों को भोजन के लिये कहना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  4.51.13-14h 
विधाय सर्वं बलवान् सर्वकामेश्वरस्तदा॥ १३॥
उवास सुखित: कालं कंचिदस्मिन् महावने।
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण कामनाओं को धारण करने वाला बलवान मयासुर यहाँ की सम्पूर्ण वस्तुओं को उत्पन्न करके इस महान वन में कुछ काल तक सुखपूर्वक निवास करता रहा ॥13 1/2॥
 
The powerful Mayasura, the possessor of all desires, having created all the things here, lived happily for some time in this great forest. ॥ 13 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)