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ramayan 4.51.11-12h: मयासुर पूर्वकाल में दैत्यों के सरदारों में विश्वकर्मा था, जिसने इस दिव्य स्वर्ण महल का निर्माण किया था॥19 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.51: हनुमान जी के पूछने पर वृद्धा तापसी का अपना तथा उस दिव्य स्थान का परिचय देकर सब वानरों को भोजन के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी के पूछने पर वृद्धा तापसी का अपना तथा उस दिव्य स्थान का परिचय देकर सब वानरों को भोजन के लिये कहना  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  4.51.11-12h 
पुरा दानवमुख्यानां विश्वकर्मा बभूव ह॥ ११॥
येनेदं काञ्चनं दिव्यं निर्मितं भवनोत्तमम्।
 
 
अनुवाद
मयासुर पूर्वकाल में दैत्यों के सरदारों में विश्वकर्मा था, जिसने इस दिव्य स्वर्ण महल का निर्माण किया था॥19 1/2॥
 
Mayasura was formerly the Vishwakarma of the chieftains of the demons, who built this divine golden palace.॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)