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ramayan 4.51.1: इस प्रकार पूछने पर हनुमान्‌जी ने चीर और कृष्ण मृगचर्म धारण किए हुए उस धर्मनिष्ठ महाभाग तपस्वी से पुनः कहा॥1॥   |   ramayan सर्ग 4.51: हनुमान जी के पूछने पर वृद्धा तापसी का अपना तथा उस दिव्य स्थान का परिचय देकर सब वानरों को भोजन के लिये कहना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी के पूछने पर वृद्धा तापसी का अपना तथा उस दिव्य स्थान का परिचय देकर सब वानरों को भोजन के लिये कहना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.51.1 
इत्युक्त्वा हनुमांस्तत्र चीरकृष्णाजिनाम्बराम्।
अब्रवीत् तां महाभागां तापसीं धर्मचारिणीम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार पूछने पर हनुमान्‌जी ने चीर और कृष्ण मृगचर्म धारण किए हुए उस धर्मनिष्ठ महाभाग तपस्वी से पुनः कहा॥1॥
 
After asking in this way, Hanuman ji again spoke to that devout Mahabhaga ascetic wearing a rag and Krishna deer skin. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)