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ramayan 4.50.22-23h: प्यास के कारण उसकी चेतना लुप्त होती जा रही थी। वह पानी पीने के लिए व्याकुल हो उठा और बेचैन होकर बिना किसी आलस्य के कुछ देर तक गड्ढे की ओर आगे बढ़ता रहा।   |   ramayan सर्ग 4.50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  4.50.22-23h 
ते नष्टसंज्ञास्तृषिता: सम्भ्रान्ता: सलिलार्थिन:॥ २२॥
परिपेतुर्बिले तस्मिन् कंचित् कालमतन्द्रिता:।
 
 
अनुवाद
प्यास के कारण उसकी चेतना लुप्त होती जा रही थी। वह पानी पीने के लिए व्याकुल हो उठा और बेचैन होकर बिना किसी आलस्य के कुछ देर तक गड्ढे की ओर आगे बढ़ता रहा।
 
His consciousness was fading away due to thirst. He was anxious to drink water and became restless and kept moving forward towards the hole for some time without any laziness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)