श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 50: भूखे-प्यासे वानरों का एक गुफा में घुसकर वहाँ दिव्य वृक्ष, दिव्य सरोवर, दिव्य भवन तथा एक वृद्धा तपस्विनी को देखना और हनुमान जी का उसका परिचय पूछना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  4.50.18-19h 
निशाम्य तस्मात् सिंहांश्च तांस्तांश्च मृगपक्षिण:॥ १८॥
प्रविष्टा हरिशार्दूला बिलं तिमिरसंवृतम्।
 
 
अनुवाद
उस छिद्रसे निकलते हुए सिंह, मृग और पक्षियोंको देखकर वे महावानर उस अंधकारसे आच्छादित गुफामें प्रवेश करने लगे ॥18 1/2॥
 
Seeing those lions, deer and birds coming out of that hole, those great monkeys began to enter the cave that was covered in darkness. ॥18 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd