श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  4.49.5 
विहाय तन्द्रीं शोकं च निद्रां चैव समुत्थिताम्।
विचिनुध्वं तथा सीतां पश्यामो जनकात्मजाम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
आलस्य, शोक और निद्रा को त्यागकर हम इस प्रकार खोज करें कि जनकपुत्री सीता का दर्शन हो जाए॥5॥
 
Abandoning laziness, grief and sleep, let us search in such a way that we may see Janaka's daughter Sita.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)