वनानि गिरयो नद्यो दुर्गाणि गहनानि च।
दरी गिरिगुहाश्चैव विचिता: सर्वमन्तत:॥ २॥
तत्र तत्र सहास्माभिर्जानकी न च दृश्यते।
तथा रक्षोऽपहर्ता च सीतायाश्चैव दुष्कृती॥ ३॥
अनुवाद
हमने वनों, पर्वतों, नदियों, दुर्गम स्थानों, घने जंगलों, गुफाओं और कंदराओं में प्रवेश करके भली-भाँति देखा; परन्तु हमें उनमें से किसी भी स्थान पर माता जानकीजी का दर्शन नहीं हुआ और न ही वह पापी राक्षस ही मिला जिसने उनका हरण किया था॥ 2-3॥
We entered into forests, mountains, rivers, inaccessible places, dense jungles, caves and caverns and looked thoroughly; but we did not see Janaki in any of those places, nor did we find the sinful demon who had abducted her.॥ 2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)