श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.49.18 
तस्याग्रमधिरूढास्ते श्रान्ता विपुलविक्रमा:।
न पश्यन्ति स्म वैदेहीं रामस्य महिषीं प्रियाम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वे महाबली वानर पर्वत की चोटी पर चढ़कर खोजते-खोजते थक गए, परन्तु श्री रामजी की प्रिय रानी सीताजी का दर्शन न कर सके॥18॥
 
Those mighty monkeys, having climbed to the top of the mountain, got tired of searching, but could not get a glimpse of Sri Rama's beloved queen, Sita. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)