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ramayan 4.49.17: वे सभी श्रेष्ठ वानर सीताजी को देखने की इच्छा से सुन्दर लोध्र वन तथा सप्तपर्ण (छितवन) के वनों में उनकी खोज करने लगे॥ 17॥   |   ramayan सर्ग 4.49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.49.17 
तत्र लोध्रवनं रम्यं सप्तपर्णवनानि च।
विचिन्वन्तो हरिवरा: सीतादर्शनकांक्षिण:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वे सभी श्रेष्ठ वानर सीताजी को देखने की इच्छा से सुन्दर लोध्र वन तथा सप्तपर्ण (छितवन) के वनों में उनकी खोज करने लगे॥ 17॥
 
All those great monkeys desiring to see Sita began to look for her in the beautiful Lodhra forest and the forests of Sapta Parna (Chhitavana).॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)