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ramayan 4.49.15: यह सुनकर वह महाबली वानर उठ खड़ा हुआ और दक्षिण दिशा की ओर चलने लगा, जो विंध्य पर्वत के जंगलों से घिरा हुआ था।   |   ramayan सर्ग 4.49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.49.15 
तत: समुत्थाय पुनर्वानरास्ते महाबला:।
विन्ध्यकाननसंकीर्णां विचेरुर्दक्षिणां दिशम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर वह महाबली वानर उठ खड़ा हुआ और दक्षिण दिशा की ओर चलने लगा, जो विंध्य पर्वत के जंगलों से घिरा हुआ था।
 
On hearing this the mighty monkey stood up and began wandering towards the south, which was surrounded by the forests of the Vindhya mountains.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)