श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.49.14 
यथोद्दिष्टानि सर्वाणि सुग्रीवेण महात्मना।
विचिन्वन्तु वनं सर्वे गिरिदुर्गाणि संगता:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
“सभी वानरों को एक साथ मिलकर उन सभी वनों और दुर्गम पर्वतीय प्रदेशों में खोज आरम्भ करनी चाहिए, जिनका उल्लेख महात्मा सुग्रीव ने किया था।”॥14॥
 
“All the monkeys should together begin to search in all the forests and inaccessible mountainous regions which Mahatma Sugreeva had mentioned.”॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)