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ramayan 4.49.1: तत्पश्चात् महाबुद्धिमान अंगद ने परिश्रम से थककर सब वानरों को आश्वासन दिया और धीरे-धीरे इस प्रकार कहने लगे-॥1॥   |   ramayan सर्ग 4.49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 49: अङ्गद और गन्धमादन के आश्वासन देने पर वानरों का पुनः उत्साह पूर्वक अन्वेषण-कार्य में प्रवृत्त होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.49.1 
अथाङ्गदस्तदा सर्वान् वानरानिदमब्रवीत्।
परिश्रान्तो महाप्राज्ञ: समाश्वास्य शनैर्वच:॥ १॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबुद्धिमान अंगद ने परिश्रम से थककर सब वानरों को आश्वासन दिया और धीरे-धीरे इस प्रकार कहने लगे-॥1॥
 
Thereafter, the great wise Angada, tired of hard work, gave assurance to all the monkeys and slowly started saying thus – ॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)