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ramayan 4.48.17-18h: तत्पश्चात्, लताओं और झाड़ियों से आच्छादित एक अन्य भयंकर वन में प्रवेश करके हनुमान्‌ आदि वानरों ने एक राक्षस को देखा जो भयंकर कर्म कर रहा था और जिसे देवताओं का भी भय नहीं था॥17 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.48: दक्षिण दिशा में गये हुए वानरों का सीता की खोज आरम्भ करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 48: दक्षिण दिशा में गये हुए वानरों का सीता की खोज आरम्भ करना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  4.48.17-18h 
ते प्रविश्य तु तं भीमं लतागुल्मसमावृतम्॥ १७॥
ददृशुर्भीमकर्माणमसुरं सुरनिर्भयम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, लताओं और झाड़ियों से आच्छादित एक अन्य भयंकर वन में प्रवेश करके हनुमान्‌ आदि वानरों ने एक राक्षस को देखा जो भयंकर कर्म कर रहा था और जिसे देवताओं का भी भय नहीं था॥17 1/2॥
 
Thereafter, entering another fierce forest covered with creepers and bushes, Hanuman and other monkeys saw a demon performing terrible deeds and who had no fear of the gods.॥ 17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)