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ramayan 4.48.14-15h: उन पुण्यात्मा ऋषि ने उस सम्पूर्ण विशाल वन को शाप दे दिया, जिससे वह आश्रयहीन, दुर्गम तथा पशु-पक्षियों से रहित हो गया ॥14 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.48: दक्षिण दिशा में गये हुए वानरों का सीता की खोज आरम्भ करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 48: दक्षिण दिशा में गये हुए वानरों का सीता की खोज आरम्भ करना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  4.48.14-15h 
तेन धर्मात्मना शप्तं कृत्स्नं तत्र महद्वनम्॥ १४॥
अशरण्यं दुराधर्षं मृगपक्षिविवर्जितम्।
 
 
अनुवाद
उन पुण्यात्मा ऋषि ने उस सम्पूर्ण विशाल वन को शाप दे दिया, जिससे वह आश्रयहीन, दुर्गम तथा पशु-पक्षियों से रहित हो गया ॥14 1/2॥
 
That virtuous sage cursed the entire vast forest, due to which it became shelterless, inaccessible and devoid of animals and birds. ॥ 14 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)