vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 47: पूर्व आदि तीन दिशाओं में गये हुए वानरों का निराश होकर लौट आना
»
श्लोक 7
श्लोक
4.47.7
विचित्य तु दिशं पूर्वां यथोक्तां सचिवै: सह।
अदृष्ट्वा विनत: सीतामाजगाम महाबल:॥ ७॥
अनुवाद
महाबली विनत ने अपने मंत्रियों के साथ पूर्व निर्देशानुसार पूर्व दिशा में खोज की और सीता को वहां न पाकर किष्किन्धा लौट आये।
Mahabali Vinaat, along with his ministers, searched in the east as instructed earlier and after not finding Sita there, returned to Kishkinda.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×