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ramayan 4.47.2: वह सरोवरों, नदियों, वनों, वनों, नगरों तथा नदियों के कारण दुर्गम प्रदेशों में सर्वत्र विचरण करके सीता की खोज करने लगा॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 4.47: पूर्व आदि तीन दिशाओं में गये हुए वानरों का निराश होकर लौट आना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 47: पूर्व आदि तीन दिशाओं में गये हुए वानरों का निराश होकर लौट आना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.47.2 
ते सरांसि सरित्कक्षानाकाशं नगराणि च।
नदीदुर्गांस्तथा देशान् विचिन्वन्ति समन्तत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वह सरोवरों, नदियों, वनों, वनों, नगरों तथा नदियों के कारण दुर्गम प्रदेशों में सर्वत्र विचरण करके सीता की खोज करने लगा॥ 2॥
 
He began to look for Sita by wandering everywhere - in lakes, rivers, groves, open spaces, cities, and regions inaccessible because of the rivers.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)