Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.46.5: 'उस समय मैं उस गुफा के द्वार पर विनम्रतापूर्वक खड़ा रहा; क्योंकि वालि मुझे वहीं छोड़ गया था। किन्तु एक वर्ष बीत जाने पर भी वालि उस गुफा के अन्दर से बाहर नहीं आया।' | ramayan सर्ग 4.46: सुग्रीव का श्रीरामचन्द्रजी को अपने भूमण्डल-भ्रमण का वृत्तान्त बताना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततोऽहं तत्र निक्षिप्तो गुहाद्वारि विनीतवत्।
न च निष्क्रामते वाली तदा संवत्सरे गते॥ ५॥
अनुवाद
'उस समय मैं उस गुफा के द्वार पर विनम्रतापूर्वक खड़ा रहा; क्योंकि वालि मुझे वहीं छोड़ गया था। किन्तु एक वर्ष बीत जाने पर भी वालि उस गुफा के अन्दर से बाहर नहीं आया।'
‘At that time I stood humbly at the entrance of that cave; because Vali had left me there. But even after a year had passed, Vali did not come out from inside it. 5.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥