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ramayan 4.46.2: तब सुग्रीव ने श्री रामचन्द्रजी से विनम्रतापूर्वक कहा - 'प्रभु! मैं आपसे सब कुछ विस्तारपूर्वक कह ​​रहा हूँ। कृपया मेरी बात सुनें।'   |   ramayan सर्ग 4.46: सुग्रीव का श्रीरामचन्द्रजी को अपने भूमण्डल-भ्रमण का वृत्तान्त बताना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 46: सुग्रीव का श्रीरामचन्द्रजी को अपने भूमण्डल-भ्रमण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.46.2 
सुग्रीवश्च ततो राममुवाच प्रणतात्मवान्।
श्रूयतां सर्वमाख्यास्ये विस्तरेण वचो मम॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब सुग्रीव ने श्री रामचन्द्रजी से विनम्रतापूर्वक कहा - 'प्रभु! मैं आपसे सब कुछ विस्तारपूर्वक कह ​​रहा हूँ। कृपया मेरी बात सुनें।'
 
Then Sugreeva humbly said to Shri Ramchandraji - 'Lord! I am telling you everything in detail. Please listen to me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)