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ramayan 4.46.18: वृक्षों और पर्वतों के पीछे से बार-बार वालि को देखकर मैं दक्षिण दिशा से चला गया और जब वालि ने मुझे भगा दिया, तब मैंने पश्चिम दिशा में शरण ली॥18॥   |   ramayan सर्ग 4.46: सुग्रीव का श्रीरामचन्द्रजी को अपने भूमण्डल-भ्रमण का वृत्तान्त बताना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 46: सुग्रीव का श्रीरामचन्द्रजी को अपने भूमण्डल-भ्रमण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.46.18 
द्रुमशैलान्तरे पश्यन् भूयो दक्षिणतोऽपराम्।
अपरां च दिशं प्राप्तो वालिना समभिद्रुत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वृक्षों और पर्वतों के पीछे से बार-बार वालि को देखकर मैं दक्षिण दिशा से चला गया और जब वालि ने मुझे भगा दिया, तब मैंने पश्चिम दिशा में शरण ली॥18॥
 
Having seen Vali repeatedly from behind the trees and mountains, I left the southern direction and when Vali chased me away, I took refuge in the western direction.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)