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ramayan 4.46.14: तत्पश्चात् पूर्व दिशा में जाकर मैंने नाना प्रकार के वृक्ष, गुफाओं से युक्त सुन्दर पर्वत और नाना प्रकार के सरोवर देखे॥14॥   |   ramayan सर्ग 4.46: सुग्रीव का श्रीरामचन्द्रजी को अपने भूमण्डल-भ्रमण का वृत्तान्त बताना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 46: सुग्रीव का श्रीरामचन्द्रजी को अपने भूमण्डल-भ्रमण का वृत्तान्त बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.46.14 
पूर्वां दिशं ततो गत्वा पश्यामि विविधान् द्रुमान्।
पर्वतान् सदरीन् रम्यान् सरांसि विविधानि च॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पूर्व दिशा में जाकर मैंने नाना प्रकार के वृक्ष, गुफाओं से युक्त सुन्दर पर्वत और नाना प्रकार के सरोवर देखे॥14॥
 
‘Thereafter going towards the east I saw various kinds of trees, beautiful mountains with caves and various kinds of lakes.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)