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ramayan 4.43.61: हे अग्नि और वायु के समान तेजस्वी और पराक्रमी वानरों! विदेहनन्दिनी सीता के दर्शन के लिए तुम जो भी कार्य या प्रयत्न करोगे, उनके द्वारा दशरथनन्दन भगवान् श्री राम का प्रिय महान कार्य पूर्ण होगा और उसी से मेरा प्रिय कार्य भी पूर्ण होगा॥61॥   |   ramayan सर्ग 4.43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  4.43.61 
तत: कृतं दाशरथेर्महत्प्रियं
महत्प्रियं चापि ततो मम प्रियम्।
कृतं भविष्यत्यनिलानलोपमा
विदेहजादर्शनजेन कर्मणा॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
हे अग्नि और वायु के समान तेजस्वी और पराक्रमी वानरों! विदेहनन्दिनी सीता के दर्शन के लिए तुम जो भी कार्य या प्रयत्न करोगे, उनके द्वारा दशरथनन्दन भगवान् श्री राम का प्रिय महान कार्य पूर्ण होगा और उसी से मेरा प्रिय कार्य भी पूर्ण होगा॥61॥
 
Apes as bright and powerful as fire and air! Whatever work or efforts you make for the darshan of Videhnandini Sita, through them the great work dear to Dashrathanandan Lord Shri Ram will be completed and by that my dear work will also be completed. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)