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ramayan 4.43.59: 'वाह! बंदरों! तुम उत्तर दिशा में केवल इतनी ही दूरी तक जा सकते हो। इसके आगे न तो सूर्य का प्रकाश है और न ही किसी देश की सीमा है। इसलिए मैं इसके आगे की भूमि के बारे में कुछ नहीं जानता।' 59   |   ramayan सर्ग 4.43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  4.43.59 
एतावद् वानरै: शक्यं गन्तुं वानरपुंगवा:।
अभास्करममर्यादं न जानीमस्तत: परम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
'वाह! बंदरों! तुम उत्तर दिशा में केवल इतनी ही दूरी तक जा सकते हो। इसके आगे न तो सूर्य का प्रकाश है और न ही किसी देश की सीमा है। इसलिए मैं इसके आगे की भूमि के बारे में कुछ नहीं जानता।' 59
 
‘Excellent monkeys! You monkeys can go only up to this distance in the north. Beyond that there is neither sunlight nor the boundary of any country. Therefore I do not know anything about the land beyond that. 59.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)