vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना
»
श्लोक 58
श्लोक
4.43.58
स हि सोमगिरिर्नाम देवानामपि दुर्गम:।
तमालोक्य तत: क्षिप्रमुपावर्तितुमर्हथ॥ ५८॥
अनुवाद
वह सोमगिरि देवताओं के लिए भी दुर्गम है, अतः तुम लोग उसे देखकर शीघ्र ही लौट जाओ।
That Somgiri is inaccessible even for the gods. Therefore, you all should return soon after merely seeing it. 58.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×