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ramayan 4.43.52: वहाँ कोई भी दुःखी नहीं रहता। बुरे कर्मों में किसी को प्रीति नहीं होती। वहाँ निवास करने से सुन्दर गुण प्रतिदिन बढ़ते रहते हैं। 52॥   |   ramayan सर्ग 4.43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  4.43.52 
तत्र नामुदित: कश्चिन्नात्र कश्चिदसत्प्रिय:।
अहन्यहनि वर्धन्ते गुणास्तत्र मनोरमा:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ कोई भी दुःखी नहीं रहता। बुरे कर्मों में किसी को प्रीति नहीं होती। वहाँ निवास करने से सुन्दर गुण प्रतिदिन बढ़ते रहते हैं। 52॥
 
Nobody is unhappy there. No one has any love for bad deeds. By living there, the beautiful qualities increase every day. 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)