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ramayan 4.43.45: इनके अतिरिक्त अन्य उत्तम वृक्ष भी फलों के रूप में नाना प्रकार के वस्त्र, मोती और लाजवन्त आभूषण देते हैं, जो स्त्री-पुरुष दोनों के उपयोग के योग्य हैं।॥ 45॥   |   ramayan सर्ग 4.43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  4.43.45 
नानाकाराणि वासांसि फलन्त्यन्ये नगोत्तमा:।
मुक्तावैदूर्यचित्राणि भूषणानि तथैव च।
स्त्रीणां यान्यनुरूपाणि पुरुषाणां तथैव च॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
इनके अतिरिक्त अन्य उत्तम वृक्ष भी फलों के रूप में नाना प्रकार के वस्त्र, मोती और लाजवन्त आभूषण देते हैं, जो स्त्री-पुरुष दोनों के उपयोग के योग्य हैं।॥ 45॥
 
‘Besides these, other excellent trees give in the form of fruits various kinds of clothes, pearls and ornaments studded with lapis lazuli, which are suitable for use by both men and women.॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)