Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.43.44: वहाँ के वृक्ष सदैव फल-फूल देते हैं और पक्षी उन पर कलरव करते रहते हैं। वे वृक्ष दिव्य सुगंध, दिव्य रस और दिव्य स्पर्श प्रदान करते हैं तथा प्राणियों की इच्छित समस्त वस्तुओं की वर्षा करते रहते हैं॥ 44॥ | ramayan सर्ग 4.43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ के वृक्ष सदैव फल-फूल देते हैं और पक्षी उन पर कलरव करते रहते हैं। वे वृक्ष दिव्य सुगंध, दिव्य रस और दिव्य स्पर्श प्रदान करते हैं तथा प्राणियों की इच्छित समस्त वस्तुओं की वर्षा करते रहते हैं॥ 44॥
‘The trees there always bear fruits and flowers and the birds keep chirping on them. Those trees provide divine fragrance, divine juice and divine touch and keep showering all the things desired by the creatures.॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥