Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.43.42-43: वहाँ की नदियों के तट गोल-गोल मोतियों, बहुमूल्य रत्नों और सुवर्ण से भरे हुए हैं। इतना ही नहीं, उन नदियों के तट पर रत्नों से भरे हुए विचित्र पर्वत भी हैं, जो उनके जल के भीतर गहरे हैं। उनमें से अनेक पर्वत सुवर्णमय हैं, जिनसे अग्नि के समान प्रकाश फैलता रहता है॥42-43॥ | ramayan सर्ग 4.43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ की नदियों के तट गोल-गोल मोतियों, बहुमूल्य रत्नों और सुवर्ण से भरे हुए हैं। इतना ही नहीं, उन नदियों के तट पर रत्नों से भरे हुए विचित्र पर्वत भी हैं, जो उनके जल के भीतर गहरे हैं। उनमें से अनेक पर्वत सुवर्णमय हैं, जिनसे अग्नि के समान प्रकाश फैलता रहता है॥42-43॥
‘The banks of the rivers there are full of round pearls, precious gems and gold. Not only this, there are also strange mountains full of gems on the banks of those rivers, which are deep inside their water. Many of those mountains are golden, from which light keeps spreading like fire.॥ 42-43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥