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ramayan 4.43.40: 'वहां के जलाशय लाल और सुनहरे कमल के गुच्छों से सुशोभित होकर प्रातःकाल उगते हुए सूर्य के समान सुन्दर लगते हैं।   |   ramayan सर्ग 4.43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  4.43.40 
रक्तोत्पलवनैश्चात्र मण्डिताश्च हिरण्मयै:।
तरुणादित्यसंकाशा भान्ति तत्र जलाशया:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
'वहां के जलाशय लाल और सुनहरे कमल के गुच्छों से सुशोभित होकर प्रातःकाल उगते हुए सूर्य के समान सुन्दर लगते हैं।
 
‘The water reservoirs there, adorned with clusters of red and golden lotuses, look as beautiful as the rising sun in the morning.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)