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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  4.43.33-34h 
हेमपुष्करसंछन्नं तत्र वैखानसं सर:॥ ३३॥
तरुणादित्यसंकाशैर्हंसैर्विचरितं शुभै:।
 
 
अनुवाद
उस आश्रम के निकट 'वैखानस सर' नामक एक सरोवर है, जिसका जल स्वर्णिम कमलों से आच्छादित है। उसमें प्रातःकालीन सूर्य के समान स्वर्णिम और लाल रंग के सुन्दर हंस विचरण करते हैं।
 
Near that ashram there is a lake known as 'Vaikhanas Sar', whose water is covered with golden lotuses. Beautiful swans of golden and red colour like the morning sun roam around in it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)