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श्लोक 4.43.31  |
स्त्रीणामश्वमुखीनां तु निकेतस्तत्र तत्र तु।
तं देशं समतिक्रम्य आश्रमं सिद्धसेवितम्॥ ३१॥ |
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| अनुवाद |
| यहाँ-वहाँ अश्वरूप मुख वाली किन्नरियों के निवास हैं। उस क्षेत्र को पार करने पर सिद्धसेवित आश्रम मिलेगा॥31॥ |
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| ‘There are residences of Kinnaris with horse-like faces here and there. After crossing that region, one will find the Siddhasevit Ashram.॥ 31॥ |
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