श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  4.43.3-4 
वृत: शतसहस्रेण त्वद्विधानां वनौकसाम्।
वैवस्वतसुतै: सार्धं प्रविष्ट: सर्वमन्त्रिभि:॥ ३॥
दिशं ह्युदीचीं विक्रान्तां हिमशैलावतंसिकाम्।
सर्वत: परिमार्गध्वं रामपत्नीं यशस्विनीम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! अपने समान एक लाख वनवासी वानरों को, जो यमराज के पुत्र हैं, साथ लेकर, अपने समस्त मंत्रियों सहित, हिमालय रूपी आभूषणों से सुशोभित उत्तर दिशा में प्रवेश करो और श्री रामजी की यशस्वी पत्नी सीता को सर्वत्र खोजो॥3-4॥
 
Valiant warrior! Take along with you one lakh forest dwelling monkeys like yourself who are the sons of Yamaraja, along with all your ministers, enter the northern direction which is adorned with ornaments in the form of Himalayas and search for the famous wife of Shri Ram, Sita, everywhere.॥ 3-4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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