श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  4.43.25 
क्रौञ्चं तु गिरिमासाद्य बिलं तस्य सुदुर्गमम्।
अप्रमत्तै: प्रवेष्टव्यं दुष्प्रवेशं हि तत् स्मृतम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद तुम क्रौंचगिरि जाकर वहाँ जो अत्यंत दुर्गम गुफा है (जो स्कन्द के तेज से पर्वत के फट जाने से उत्पन्न हुई थी) उसमें बड़ी सावधानी से प्रवेश करो; क्योंकि उसके भीतर प्रवेश करना अत्यंत कठिन माना जाता है॥ 25॥
 
‘After this you should go to Kraunchagiri and enter the extremely inaccessible cave there (which was created due to the mountain being torn apart by Skanda's power) with great caution; because entering inside it is considered extremely difficult.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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