श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.43.15 
महत्सु तस्य शैलेषु पर्वतेषु गुहासु च।
विचिन्वत महाभागां रामपत्नीमनिन्दिताम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
‘उस पर्वत की शाखाएँ रूपी अन्य छोटे-बड़े पर्वतों में तथा उन सब पर्वतों की गुफाओं में भगवान राम की पतिव्रता और धर्मपरायण पत्नी महाभाग सीता को खोजो। ॥15॥
 
‘Search for the chaste and virtuous wife of Lord Rama, Mahabhaga Sita, in the other big and small mountains which are branches of that mountain and in the caves of all those mountains. ॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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