श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 43: सुग्रीव का उत्तर दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए शतबलि आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.43.10 
इमानि बहुदुर्गाणि नद्य: शैलान्तराणि च।
भवन्त: परिमार्गन्तु बुद्धिविक्रमसम्पदा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘तुम सब लोग अपनी बुद्धि और पराक्रम से इन दुर्गम प्रदेशों, पर्वतों और नदी तटों पर जाकर सीता की खोज करो।॥10॥
 
‘All of you should use your wisdom and valour to go to these inaccessible regions, mountains and river banks and search for Sita.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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