तत: संदिश्य सुग्रीव: श्वशुरं पश्चिमां दिशम्।
वीरं शतबलिं नाम वानरं वानरेश्वर:॥ १॥
उवाच राजा सर्वज्ञ: सर्ववानरसत्तम:।
वाक्यमात्महितं चैव रामस्य च हितं तदा॥ २॥
अनुवाद
इस प्रकार अपने श्वसुर को पश्चिम दिशा की ओर जाने का संदेश देकर सर्वज्ञ, सर्वेश्वर-स्वरूप वानरराज सुग्रीव ने अपने हितैषी शतबली नामक वीर वानर से श्री रामचन्द्रजी के कल्याण की बात कही- ॥1-2॥
In this way, giving a message to his father-in-law to go towards the west, King Sugriva, the omniscient, all-monkey-sovereign monkey, spoke about the welfare of Shri Ramchandraji to his well-wisher, the brave monkey named Shatabali – ॥ 1-2॥