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ramayan 4.42.51: 'हे वानरों! बंदर पश्चिम में केवल इतनी ही दूरी तक जा सकते हैं। इसके आगे न तो सूर्य का प्रकाश है और न ही किसी देश की सीमा है। इसलिए मुझे इसके आगे की भूमि के बारे में कोई जानकारी नहीं है।'   |   ramayan सर्ग 4.42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  4.42.51 
एतावद् वानरै: शक्यं गन्तुं वानरपुङ्गवा:।
अभास्करममर्यादं न जानीमस्तत: परम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
'हे वानरों! बंदर पश्चिम में केवल इतनी ही दूरी तक जा सकते हैं। इसके आगे न तो सूर्य का प्रकाश है और न ही किसी देश की सीमा है। इसलिए मुझे इसके आगे की भूमि के बारे में कोई जानकारी नहीं है।'
 
‘O monkey-heads! The monkeys can go only up to this distance in the west. Beyond that there is neither sunlight nor the boundary of any country. Hence I have no information about the land beyond that.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)