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ramayan 4.42.45: नाना प्रकार के पक्षियों से युक्त नाना प्रकार के वृक्ष इसकी शोभा बढ़ाते हैं। यह पाश धारण करने वाले महान वरुण का निवास स्थान है॥ 45॥   |   ramayan सर्ग 4.42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  4.42.45 
शोभितं तरुभिश्चित्रैर्नानापक्षिसमाकुलै:।
निकेतं पाशहस्तस्य वरुणस्य महात्मन:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
नाना प्रकार के पक्षियों से युक्त नाना प्रकार के वृक्ष इसकी शोभा बढ़ाते हैं। यह पाश धारण करने वाले महान वरुण का निवास स्थान है॥ 45॥
 
‘The various trees populated by various kinds of birds enhance its beauty. It is the abode of the great Varuna who holds the noose.॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)