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ramayan 4.42.34: उसके चारों ओर के हाथी, सूअर, सिंह और व्याघ्र निरन्तर गर्जना करते रहते हैं और अपनी ही गर्जना की प्रतिध्वनि से अभिमान से भरकर पुनः गर्जना करते हैं॥34॥   |   ramayan सर्ग 4.42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 42: सुग्रीव का पश्चिम दिशा के स्थानों का परिचय देते हुए सुषेण आदि वानरों को वहाँ भेजना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  4.42.34 
तं गजाश्च वराहाश्च सिंहा व्याघ्राश्च सर्वत:।
अभिगर्जन्ति सततं तेन शब्देन दर्पिता:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उसके चारों ओर के हाथी, सूअर, सिंह और व्याघ्र निरन्तर गर्जना करते रहते हैं और अपनी ही गर्जना की प्रतिध्वनि से अभिमान से भरकर पुनः गर्जना करते हैं॥34॥
 
The elephants, boars, lions and tigers all around him roar perpetually, and filled with pride at the echo of their own roars, they roar again.॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)