श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 39: श्रीरामचन्द्रजी का सुग्रीव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना तथा विभिन्न वानरयूथपतियों का अपनी सेनाओं के साथ  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.39.8 
एतस्मिन्नन्तरे चैव रज: समभिवर्तत।
उष्णतीव्रां सहस्रांशोश्छादयद् गगने प्रभाम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जब श्रीराम और सुग्रीव इस प्रकार बातचीत कर रहे थे, तभी धूल का एक बड़ा तूफान उठा, जो आकाश में फैल गया और उसने सूर्य के तेज को ढक लिया।
 
While Sri Rama and Sugreeva were conversing in this manner, a great dust storm arose which spread across the sky and covered the blazing light of the Sun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)