श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 39: श्रीरामचन्द्रजी का सुग्रीव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना तथा विभिन्न वानरयूथपतियों का अपनी सेनाओं के साथ  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  4.39.36 
नलश्चापि महावीर्य: संवृतो द्रुमवासिभि:।
कोटीशतेन सम्प्राप्त: सहस्रेण शतेन च॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
तभी एक अरब एक हजार एक सौ वृक्षवासी वानरों से घिरे हुए महाबली नल प्रकट हुए।
 
Then the mighty Nala appeared, surrounded by one billion, one thousand and one hundred tree-dwelling monkeys.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)