श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 39: श्रीरामचन्द्रजी का सुग्रीव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना तथा विभिन्न वानरयूथपतियों का अपनी सेनाओं के साथ  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.39.12 
नादेयै: पार्वतेयैश्च सामुद्रैश्च महाबलै:।
हरिभिर्मेघनिर्ह्रादैरन्यैश्च वनवासिभि:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
नदी, पर्वत, वन और समुद्र आदि सभी स्थानों से महाबली वानर एकत्र हुए और बादलों की गर्जना के समान जोर से गर्जना करने लगे।
 
The mighty monkeys from all the places like rivers, mountains, forests and seas gathered together and roared loudly like the roar of the clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)