श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 39: श्रीरामचन्द्रजी का सुग्रीव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना तथा विभिन्न वानरयूथपतियों का अपनी सेनाओं के साथ  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.39.11 
निमेषान्तरमात्रेण ततस्तैर्हरियूथपै:।
कोटीशतपरीवारैर्वानरैर्हरियूथपै:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पलक झपकते ही अरबों वानरों से घिरे हुए असंख्य योद्धा आ पहुंचे और सारी धरती को ढक लिया। 11.
 
In the blink of an eye, innumerable warriors surrounded by billions of monkeys arrived and covered the whole land. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)