श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  4.38.4-5h 
किष्किन्धाया विनिष्क्राम यदि ते सौम्य रोचते।
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा लक्ष्मणस्य सुभाषितम्॥ ४॥
सुग्रीव: परमप्रीतो वाक्यमेतदुवाच ह।
 
 
अनुवाद
सौम्य! यदि तुम्हारी रुचि हो, तो अभी किष्किन्धा से चले जाओ।’ लक्ष्मण का यह सुन्दर वचन सुनकर सुग्रीव अत्यन्त प्रसन्न हुए और इस प्रकार बोले-॥4 1/2॥
 
Soumya! If you are interested, then get out of Kishkinda now.' Hearing this beautiful statement of Lakshman, Sugreeva became very happy and spoke thus -॥ 4 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)