श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.38.27 
एते वानरमुख्याश्च शतश: शत्रुसूदन।
प्राप्ताश्चादाय बलिन: पृथिव्यां सर्ववानरान्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन! ये सैकड़ों बलवान और श्रेष्ठ वानर संसार के समस्त बलवान वानरों के साथ यहाँ आये हैं॥ 27॥
 
Shatrusudan! These hundreds of strong and prominent monkeys have come here along with all the strong monkeys of the world.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)