श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.38.26 
तव देव प्रसादाच्च भ्रातुश्च जयतां वर।
कृतं न प्रतिकुर्याद् य: पुरुषाणां हि दूषक:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे विजयी योद्धाओं में श्रेष्ठ प्रभु! आपकी और आपके भाई की कृपा से ही मैं वानर राज्य में पुनः स्थापित हुआ हूँ। जो अपने प्रति किये गए उपकार का बदला नहीं चुकाता, वह मनुष्यों में धर्म की अपकीर्ति करने वाला माना जाता है॥ 26॥
 
O Lord, the best among victorious warriors! It is only by your and your brother's grace that I have been re-established in the monkey kingdom. One who does not repay the favours done to him is considered to be one who brings disrepute to Dharma among men.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)