श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  4.38.24-25 
एवमुक्तस्तु सुग्रीवो रामं वचनमब्रवीत्॥ २४॥
प्रणष्टा श्रीश्च कीर्तिश्च कपिराज्यं च शाश्वतम्।
त्वत्प्रसादान्महाबाहो पुन: प्राप्तमिदं मया॥ २५॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी की यह बात सुनकर सुग्रीव ने उनसे कहा- 'महाबाहो! मेरा धन, यश और वानरों का चिरस्थायी राज्य - ये सब नष्ट हो गए थे। आपकी कृपा से ही मुझे ये सब पुनः प्राप्त हुए हैं॥ 24-25॥
 
On hearing this from Shri Ram, Sugriv said to him- 'Mahabaho! My wealth, fame and the everlasting kingdom of the monkeys - all these had been destroyed. It is only by your grace that I have regained all these.॥ 24-25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)