श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 38: सुग्रीव का भगवान श्रीराम के चरणों में प्रणाम, सुग्रीव का अपने किये हुए सैन्य संग्रह विषयक उद्योग को बताना और उसे सुनकर श्रीराम का प्रसन्न होना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  4.38.23-24h 
उद्योगसमयस्त्वेष प्राप्त: शत्रुनिषूदन॥ २३॥
संचिन्त्यतां हि पिङ्गेश हरिभि: सह मन्त्रिभि:।
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन! यही समय है कि हम लोग कार्यवाही करें। हे वानरराज! आप इन वानरों और मंत्रियों से इस विषय पर विचार-विमर्श करें।॥23 1/2॥
 
‘Shatrusudan! This is the time for us to take action. O monkey king! You should discuss this matter with these monkeys and ministers.’॥ 23 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)